न्यूज: NRM
नई दिल्ली: चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने मतदाता सूची को शुद्ध करने और अवैध प्रवासियों को हटाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। आयोग ने फैसला किया है कि 2003-04 के बाद वोटर लिस्ट में शामिल सभी मतदाताओं और नए आवेदकों को यह सेल्फ-अटेस्टेड घोषणा देनी होगी कि वे भारत के नागरिक हैं, चाहे वे जन्म से भारतीय हों या पंजीकरण/नागरिकता प्राप्ति के माध्यम से। यह प्रक्रिया सबसे पहले बिहार में शुरू हो रही है, जहां विधानसभा चुनाव इस साल के अंत में होने हैं।
चुनाव आयोग ने इस विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) का उद्देश्य सभी पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना, गैर-पात्र व्यक्तियों को हटाना और प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना बताया है। आयोग ने कहा कि तेजी से शहरीकरण, बार-बार प्रवास, नए मतदाताओं का शामिल होना, मृत्यु की गैर-रिपोर्टिंग और विदेशी अवैध प्रवासियों के नाम शामिल होने जैसे कारणों ने इस संशोधन को आवश्यक बना दिया है।

बिहार में शुरू होगी प्रक्रिया
बिहार में यह प्रक्रिया 25 जून, 2025 से शुरू हो चुकी है, जिसमें 1 जुलाई को क्वालिफाइंग तारीख के रूप में निर्धारित किया गया है। बूथ लेवल ऑफिसर (BLOs) घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। सभी मतदाताओं को एक प्री-फिल्ड एन्यूमरेशन फॉर्म भरना होगा, जिसमें जन्म तिथि और जन्म स्थान के दस्तावेजी सबूत या नागरिकता पंजीकरण/नागरिकता प्राप्ति का प्रमाण देना होगा। यदि माता-पिता में से कोई गैर-भारतीय है, तो उनके जन्म के समय माता-पिता के वैध पासपोर्ट और वीजा की कॉपी भी जमा करनी होगी।
2003 की मतदाता सूची को पात्रता के लिए प्रारंभिक सबूत माना जाएगा, जब तक कि कोई अन्य जानकारी प्राप्त न हो। बिहार में आखिरी बार विशेष गहन संशोधन 2003 में हुआ था, और अब 22 साल बाद यह कदम उठाया जा रहा है।
छह राज्यों में होगी समीक्षा
चुनाव आयोग ने बिहार के बाद पांच अन्य राज्यों में भी 2026 में होने वाले चुनावों से पहले मतदाता सूची की समीक्षा करने का फैसला किया है। इन राज्यों में घर-घर सत्यापन के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मतदाता सूची त्रुटि-मुक्त रहे। आयोग ने एक अतिरिक्त ‘घोषणा फॉर्म’ भी पेश किया है, जो उन आवेदकों के लिए अनिवार्य होगा जो नए मतदाता बनना चाहते हैं या राज्य के बाहर से स्थानांतरित हो रहे हैं।
विपक्ष के आरोप और पारदर्शिता
यह कदम ऐसे समय में आया है जब विपक्ष, खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप लगाए हैं। आयोग ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि सभी चुनाव संसद द्वारा पारित कानूनों और स्थापित नियमों के अनुसार आयोजित किए जाते हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और इसमें बूथ लेवल एजेंट्स सहित हजारों कर्मचारी शामिल होते हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर होगी लागू
इसके साथ ही, चुनाव आयोग ने मतदाता पहचान पत्र (EPIC) की डिलीवरी को और तेज करने का ऐलान किया है। अब मतदाता सूची में अपडेट के 15 दिनों के भीतर वोटर आईडी कार्ड डाक विभाग के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंच जाएगा, और प्रत्येक चरण में एसएमएस के जरिए सूचना दी जाएगी।
निष्कर्ष
चुनाव आयोग का यह कदम न केवल मतदाता सूची की शुद्धता को सुनिश्चित करेगा, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में पारदर्शिता और विश्वास को भी बढ़ाएगा। बिहार में शुरू होने वाली यह प्रक्रिया देश भर में मतदाता सूची को त्रुटि-मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
