बी० कोठी प्रखंड के ठाढ़ी भरना गांव में उस समय शोक की गहरी छाया छा गई जब क्षेत्र के चर्चित, मिलनसार और समाजसेवी व्यक्तित्व के धनी स्व. आशीष शुक्ला उर्फ बुच्चन शुक्ला जी का आकस्मिक निधन हो गया। श्री संजय शुक्ला जी के बड़े भाई रहे स्व. आशीष शुक्ला का अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां चिकित्सकों की सलाह पर बेहतर इलाज हेतु उन्हें पूर्णिया GMCH रेफर किया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश पटना से पूर्णिया ले जाने के क्रम में ही रास्ते में उनका देहांत हो गया।
यह हृदयविदारक समाचार सुनते ही न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा गांव और आसपास का क्षेत्र गमगीन हो गया। हर कोई स्तब्ध रह गया कि हमेशा प्रसन्नचित और सबके साथ खड़े रहने वाले आशीष शुक्ला अब उनके बीच नहीं रहे।
परिवार और समाज के लिए अपूरणीय क्षति
आशीष शुक्ला जी अपने परिवार के लिए तो आधार स्तंभ थे ही, साथ ही समाज में भी उनकी पहचान एक सहयोगी और मददगार व्यक्ति की थी। लोगों का कहना है कि वे हमेशा सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और जरूरतमंदों की हरसंभव मदद करते थे। उनके जाने से परिवार की जो क्षति हुई है, वह कभी पूरी नहीं हो सकती।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि स्व. बुच्चन शुक्ला का व्यक्तित्व हमेशा से मिलनसार और सौम्य रहा। वे लोगों के दुख-दर्द में शरीक होते थे और सबको अपनेपन का एहसास दिलाते थे। यही कारण है कि आज उनके निधन की खबर से हर कोई शोक संतप्त है और उनकी कमी लंबे समय तक खलती रहेगी।
विधायक प्रतिनिधि ने जताया शोक
स्व. आशीष शुक्ला जी के निधन की सूचना मिलते ही रूपौली विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय विधायक श्री शंकर सिंह की धर्मपत्नी सह जिला परिषद सदस्य प्रतिमा सिंह उनके पैतृक गांव ठाढ़ी भरना पहुँचीं। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया और गहरी संवेदना व्यक्त की।
प्रतिमा सिंह ने कहा कि स्व. आशीष शुक्ला का व्यक्तित्व हमेशा लोगों को प्रेरणा देता रहेगा। उनके निधन से समाज ने एक नेकदिल और सहयोगी व्यक्ति को खो दिया है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति प्रदान हो।
क्षेत्र में पसरा मातम का माहौल
गांव और आसपास के क्षेत्रों में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है। हर कोई अपने-अपने तरीके से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। लोगों का कहना है कि आशीष शुक्ला जी का योगदान हमेशा समाज की भलाई और एकता के लिए रहा। वे गांव के हर छोटे-बड़े कार्य में सक्रिय रहते थे और युवाओं को भी सामाजिक कार्यों के लिए प्रोत्साहित करते थे।
गांव के युवाओं ने कहा कि बुच्चन शुक्ला हमेशा उन्हें सही मार्ग दिखाते थे और समाज में एकता बनाए रखने की सीख देते थे। उनका कहना है कि उनके व्यक्तित्व से प्रेरणा लेकर वे समाजसेवा के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे।
एक युग का अंत
आशीष शुक्ला जी का निधन एक युग के अंत जैसा माना जा रहा है। क्योंकि वे न केवल एक परिवार के बड़े सदस्य थे, बल्कि पूरे समाज के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाते थे। उनके जाने से गांव में जो रिक्तता उत्पन्न हुई है, उसे पूरा करना आसान नहीं होगा।
लोगों ने कहा कि वे जिस सरलता और सहजता के साथ सबका दिल जीतते थे, वह उन्हें दूसरों से अलग बनाता था। उनके निधन से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसकी भरपाई संभव नहीं है।
श्रद्धांजलि
इस कठिन समय में पूरा क्षेत्र शोकाकुल परिवार के साथ खड़ा है। सभी लोगों ने एक स्वर में ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले और उनके परिवार को यह अपूरणीय क्षति सहने का साहस प्रदान हो।
स्व. आशीष शुक्ला उर्फ बुच्चन शुक्ला की यादें हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगी। उनके सामाजिक योगदान और नेकदिल स्वभाव को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।ॐ शांति।
